Sunday, 22 January 2012

हजारों अभ्यर्थियों को डाक विभाग का झटका



Story Update : Sunday, January 22, 2012    12:03 AM

प्रतापगढ़। डाक विभाग ने हजारों टीईटी अभ्यर्थियों के सपनों पर पानी फेर दिया है। स्पीड पोस्ट की आनलाइन सेवा को धता बताते हुए विभाग ने कथनी और करनी में भी अंतर उजागर कर दिया है। डाक विभाग से थोक के भाव वापस लौटने वाले आवेदन पत्र लेकर अभ्यर्थी उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाने की रणनीति बना रहे हैं।
जिले का प्रधान डाकघर और उप डाकघर कंप्यूटरीकृत हो गए हैं। इन केंद्रों से स्पीड पोस्ट करने पर पाने वाले को पत्र किस तिथि को मिला है इसकी जानकारी प्रेषक घर बैठे इंटरनेट के माध्यम से हासिल कर सकता है। ऐसा विभाग का दावा है। कागजी साबित हो रहे इस दावे की पोल खुल गई है। हजारों की संख्या में टीईटी अभ्यर्थियों के आवेदन पत्र वापस आने पर विभागीय अधिकारियों की घिग्घी बंध गई है। विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों की लापरवाही का आलम यह रहा कि किसी भी आवेदन पत्र को स्कैन किया ही नहीं गया जिससे अभ्यर्थियों के लाख प्रयास के बाद भी नेट पर खोजे नहीं मिला। संडवा चंद्रिका के रायतारा निवासी प्रदीप कुमार सिंह का आवेदन पत्र सप्ताह भर में 30 किमी की दूरी पर स्थित डायट तक नहीं पहुंचने से कर्मचारियों की अकर्मण्यता साफ जाहिर हो रही है। प्रदीप के मुताबिक भविष्य से खिलवाड़ करने वाले डाक विभाग के खिलाफ वह न्यायालय जाएंगे।
टीईटी आवेदन पत्र ही नहीं बल्कि डाक विभाग की अजीबोगरीब कहानी प्राय: सुनने को मिलती रहती है। रजिस्ट्री होने के बाद भी आवेदन पत्र चोरी होना, पासपोर्ट का गायब होना और डाक आने के बाद भी महीनों वितरित न होना आम बात हो गई है। बीते दिनों टीईटी के तेरह आवेदन पत्रों से टिकट चोरी होने पर महिला कर्मचारी को निलंबित किया था। प्रवरडाक अधीक्षक एपी तिवारी ने बताया कि टीईटी के आवेदन पत्र अधिक होने के कारण स्कैन नहीं किए गए थे। भारी मात्रा में आवेदन पत्र वापस होने पर बताया कि इलाहाबाद और वाराणसी में अधिक संख्या में आवेदन आने के कारण समय से छंटाई का कार्य नहीं हो सका। इससे वे गन्तव्य तक नहीं पहुंच सके।

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