आज मिलेंगे टीईटी के प्रमाण पत्र | |
| Story Update : Tuesday, January 24, 2012 1:58 AM | |
मेरठ। टीईटी के प्रमाण-पत्रों का वितरण मंगलवार से जीआईसी मेरठ में शुरू होगा। प्रमाण पत्र 24 से 30 जनवरी तक मिलेंगे। समय सुबह दस बजे से तीन बजे का रखा गया है। पहले प्राथमिक स्तर वाले प्रमाण पत्रों का वितरण होगा। इसके लिए अभ्यर्थियों को प्रमाण पत्र लेने के लिए फोटो के साथ टीईटी परीक्षा 2011 का प्रवेश पत्र साथ लाना होगा। प्रमाण पत्र के वितरण के लिए कालेज में 14 काउंटर बनाए गए हैं। |
Monday, 23 January 2012
आज मिलेंगे टीईटी के प्रमाण पत्र
Sunday, 22 January 2012
हजारों अभ्यर्थियों को डाक विभाग का झटका | |
| Story Update : Sunday, January 22, 2012 12:03 AM | |
प्रतापगढ़। डाक विभाग ने हजारों टीईटी अभ्यर्थियों के सपनों पर पानी फेर दिया है। स्पीड पोस्ट की आनलाइन सेवा को धता बताते हुए विभाग ने कथनी और करनी में भी अंतर उजागर कर दिया है। डाक विभाग से थोक के भाव वापस लौटने वाले आवेदन पत्र लेकर अभ्यर्थी उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाने की रणनीति बना रहे हैं। जिले का प्रधान डाकघर और उप डाकघर कंप्यूटरीकृत हो गए हैं। इन केंद्रों से स्पीड पोस्ट करने पर पाने वाले को पत्र किस तिथि को मिला है इसकी जानकारी प्रेषक घर बैठे इंटरनेट के माध्यम से हासिल कर सकता है। ऐसा विभाग का दावा है। कागजी साबित हो रहे इस दावे की पोल खुल गई है। हजारों की संख्या में टीईटी अभ्यर्थियों के आवेदन पत्र वापस आने पर विभागीय अधिकारियों की घिग्घी बंध गई है। विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों की लापरवाही का आलम यह रहा कि किसी भी आवेदन पत्र को स्कैन किया ही नहीं गया जिससे अभ्यर्थियों के लाख प्रयास के बाद भी नेट पर खोजे नहीं मिला। संडवा चंद्रिका के रायतारा निवासी प्रदीप कुमार सिंह का आवेदन पत्र सप्ताह भर में 30 किमी की दूरी पर स्थित डायट तक नहीं पहुंचने से कर्मचारियों की अकर्मण्यता साफ जाहिर हो रही है। प्रदीप के मुताबिक भविष्य से खिलवाड़ करने वाले डाक विभाग के खिलाफ वह न्यायालय जाएंगे। टीईटी आवेदन पत्र ही नहीं बल्कि डाक विभाग की अजीबोगरीब कहानी प्राय: सुनने को मिलती रहती है। रजिस्ट्री होने के बाद भी आवेदन पत्र चोरी होना, पासपोर्ट का गायब होना और डाक आने के बाद भी महीनों वितरित न होना आम बात हो गई है। बीते दिनों टीईटी के तेरह आवेदन पत्रों से टिकट चोरी होने पर महिला कर्मचारी को निलंबित किया था। प्रवरडाक अधीक्षक एपी तिवारी ने बताया कि टीईटी के आवेदन पत्र अधिक होने के कारण स्कैन नहीं किए गए थे। भारी मात्रा में आवेदन पत्र वापस होने पर बताया कि इलाहाबाद और वाराणसी में अधिक संख्या में आवेदन आने के कारण समय से छंटाई का कार्य नहीं हो सका। इससे वे गन्तव्य तक नहीं पहुंच सके। |
uptet
सहारनपुर। उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा पास करने वाले 60 हजार से अधिक आवेदक तो टीईटी की टेंशन से तो जूझ ही रहे हैं। साथ ही इन्हीं आवेदकों में सैकड़ों युवा ऐसे भी हैं, जो बीटीसी की बेबसी में फंसे हैं। बीटीसी 2011 के तहत डायट की सीटों के लिए तो बीटीसी की नियुक्ति प्रक्रिया शुरू होने के बाद किसी तरह काउंसिलिंग पूरी करा भी ली गई, लेकिन निजी कालेजों की सीटों पर बीटीसी के बारे में अब तक स्थिति स्पष्ट न होने से आवेदक परेशान हैं।
बीटीसी 2011 के लिए जिला शिक्षा प्रशिक्षण संस्थान पटनी को अलग-अलग वर्गों से कुल 12 हजार से अधिक आवेदन तो जरूर आए, लेकिन डायट स्तर की 200 सीटों पर ही काउंसिलिंग में आने वालों की हालत ऐसी रही कि इनमें से 187 चयनितों का प्रवेश हो पाया। इसकी 13 सीटें खाली रह गईं। सूत्रों की मानें तो ज्यादातर आवेदक निजी कॉलेजों की सीटों से काउंसिलिंग कराने की कोशिश में थे, लेकिन इन कालेजों में सीटों के लिए नवीन मान्यता और फीस संबंधी तकनीकी दिक्कतों के कारण यह प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पाई।
निजी कालेजों से बीटीसी की उम्मीद लगाए कुछ आवेदकों मनीष कुमार, दीपक और अतुल का कहना है कि शिक्षक पात्रता परीक्षा के फार्मूले ने तो पहले ही बीटीसी का क्रेज कम कर दिया है, क्योंकि बीटीसी अब एक प्रशिक्षण पाठ्यक्रम रह गया है। इसके बावजूद जो कोर्स के रूप में इसे करना भी चाहते हैं, उनकी प्रक्रिया अधर में लटकी पड़ी है।
डायट की 200 सीटों के अलावा लगभग 150 सीटों के लिए बीटीसी आवेदकों की काउंसिलिंग की जानी है। इस हालात में डायट प्राचार्य संजय उपाध्याय का कहना था कि अभी तो टीईटी की टेंशन ही दूर नहीं हो पाई है। बीटीसी के मामले में अभी और इंतजार करना होगा।
बीटीसी 2011 के लिए जिला शिक्षा प्रशिक्षण संस्थान पटनी को अलग-अलग वर्गों से कुल 12 हजार से अधिक आवेदन तो जरूर आए, लेकिन डायट स्तर की 200 सीटों पर ही काउंसिलिंग में आने वालों की हालत ऐसी रही कि इनमें से 187 चयनितों का प्रवेश हो पाया। इसकी 13 सीटें खाली रह गईं। सूत्रों की मानें तो ज्यादातर आवेदक निजी कॉलेजों की सीटों से काउंसिलिंग कराने की कोशिश में थे, लेकिन इन कालेजों में सीटों के लिए नवीन मान्यता और फीस संबंधी तकनीकी दिक्कतों के कारण यह प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पाई।
निजी कालेजों से बीटीसी की उम्मीद लगाए कुछ आवेदकों मनीष कुमार, दीपक और अतुल का कहना है कि शिक्षक पात्रता परीक्षा के फार्मूले ने तो पहले ही बीटीसी का क्रेज कम कर दिया है, क्योंकि बीटीसी अब एक प्रशिक्षण पाठ्यक्रम रह गया है। इसके बावजूद जो कोर्स के रूप में इसे करना भी चाहते हैं, उनकी प्रक्रिया अधर में लटकी पड़ी है।
डायट की 200 सीटों के अलावा लगभग 150 सीटों के लिए बीटीसी आवेदकों की काउंसिलिंग की जानी है। इस हालात में डायट प्राचार्य संजय उपाध्याय का कहना था कि अभी तो टीईटी की टेंशन ही दूर नहीं हो पाई है। बीटीसी के मामले में अभी और इंतजार करना होगा।
इलाहाबाद। सहायक अध्यापक चयन प्रक्रिया पर ब्रेक से निराश, परेशान शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) पास अभ्यर्थियों के लिए खुशखबरी! नए सत्र में शिक्षकों की विशेष भर्ती प्रक्रिया से 80 हजार और पद जुड़ जाएंगे। बेसिक शिक्षा विभाग में रिक्त पड़े पदों को जल्द से जल्द भरने के सर्व शिक्षा अभियान की पहल के बाद मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने इसकी संस्तुति कर दी है। तय किया गया है कि आचार संहिता खत्म होने के बाद सर्व शिक्षा अभियान की तरफ से प्रस्ताव एनसीटीई को भेजा जाएगा।
नई चयन प्रक्रिया को विशेष भर्ती अभियान के तौर पर ही प्रस्तुत किया जाएगा लेकिन ये पद पहले से घोषित पदों से अलग होंगे। यह भी साफ है कि चयन का आधार टीईटी को ही बनाया जाएगा। प्रारूप बनाने वाले अधिकारियों का कहना है कि टीईटी के बाद बीएड या बीटीसी कोई मुद्दा नहीं रहा। एनसीटीई को सभी अधिनियमों की जानकारी देकर यही समझाया जाएगा ताकि चयन में आगे कोई विवाद न खड़ा हो। अधिकारियों की मानें तो वर्तमान में चल रही चयन प्रक्रिया भी एनसीटीई की समय सीमा के दायरे से मुक्त होगी। प्रस्ताव में यदि कोई बड़ा बदलाव न किया गया तो यह भी तय है कि नए पदों पर चयन टीईटी मेरिट से नहीं होगा। टीईटी को केवल आवेदन के लिए पात्र माना जाएगा। चयन के लिए या तो परीक्षा होगी या फिर पूर्व की डिग्रियों को आधार बनाया जाएगा।
प्रारूप तैयार करने वाली कमेटी के सदस्य, सर्व शिक्षा अभियान के सह समन्वयक और उप शिक्षा निदेशक नवनीत भदौरिया ने बताया कि आचार संहिता के मद्देनजर प्रारूप तैयार होने के बाद आगे की प्रक्रिया रोक दी गई है लेकिन नए सत्र में इन पदों पर चयन लगभग तय है।
नई चयन प्रक्रिया को विशेष भर्ती अभियान के तौर पर ही प्रस्तुत किया जाएगा लेकिन ये पद पहले से घोषित पदों से अलग होंगे। यह भी साफ है कि चयन का आधार टीईटी को ही बनाया जाएगा। प्रारूप बनाने वाले अधिकारियों का कहना है कि टीईटी के बाद बीएड या बीटीसी कोई मुद्दा नहीं रहा। एनसीटीई को सभी अधिनियमों की जानकारी देकर यही समझाया जाएगा ताकि चयन में आगे कोई विवाद न खड़ा हो। अधिकारियों की मानें तो वर्तमान में चल रही चयन प्रक्रिया भी एनसीटीई की समय सीमा के दायरे से मुक्त होगी। प्रस्ताव में यदि कोई बड़ा बदलाव न किया गया तो यह भी तय है कि नए पदों पर चयन टीईटी मेरिट से नहीं होगा। टीईटी को केवल आवेदन के लिए पात्र माना जाएगा। चयन के लिए या तो परीक्षा होगी या फिर पूर्व की डिग्रियों को आधार बनाया जाएगा।
प्रारूप तैयार करने वाली कमेटी के सदस्य, सर्व शिक्षा अभियान के सह समन्वयक और उप शिक्षा निदेशक नवनीत भदौरिया ने बताया कि आचार संहिता के मद्देनजर प्रारूप तैयार होने के बाद आगे की प्रक्रिया रोक दी गई है लेकिन नए सत्र में इन पदों पर चयन लगभग तय है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट: टी ई टी / मार्क्स मेरिट से सेलेक्सन के विरोध की याचिका ख़ारिज
प्रकरण विवरण देखें:इलाहाबाद में महकमा के उच्च न्यायालय? कोर्ट सं - 33
प्रकरण: - रिट - 2011 - 75474 के एक सं.
याचिकाकर्ता: - डॉ. प्रशांत कुमार दुबेप्रतिवादी: - उत्तर प्रदेश स्टेट और अन्ययाचिकाकर्ता वकील: - आलोक मिश्राप्रतिवादी वकील: - C.S.C.
माननीय सुधीर अग्रवाल, जे.1. वकील याचिकाकर्ता के लिए सीखा है कि नियम 14 (1) प्रस्तुत करने की कोशिश की और उत्तर प्रदेश (2) के मूल (शिक्षक) शिक्षा सेवा नियम, 1981 के रूप में अधिसूचना द्वारा संशोधन 9th नवंबर को, 2011 उत्तर प्रदेश में संशोधन कर बेसिक शिक्षा (शिक्षक) सेवा नियमावली, 1981 यानी 12 वीं संशोधन अवैध है, यद्यपि के रूप में, यह द्वारा तैयार किया जा सूची में एक व्यक्ति सहित के लिए आधार के रूप में शिक्षक पात्रता परीक्षा (hereinafter के रूप में "TET" कहा जाता है) में प्राप्त अंकों बनाता है जो चयन समिति को प्रस्तुत TET हालांकि नियुक्ति के लिए जारी विज्ञापन के बाद नियुक्ति प्राधिकारी केवल पात्रता योग्यता है और चयन करने के लिए एक आधार नहीं कर सकते.
2]. प्रस्तुत अच्छी तरह से गलत है. कल्पना का कोई मायने द्वारा नियम के पूर्वोक्त संशोधन, नेशनल काउंसिल फॉर टीचर एजुकेशन (hereinafter के रूप में "एनसीटीई" कहा जाता है) द्वारा जारी दिशा - निर्देशों के विपरीत के रूप में लगाया जा सकता है है यद्यपि के रूप में, एनसीटीई TET प्रदान करता है प्राथमिक शिक्षकों की नियुक्ति के लिए आवश्यक योग्यता के रूप में योग्यता है, लेकिन एक साथ प्रदान करता है कि यह किसी भी व्यक्ति को नियुक्ति नहीं ऐसी योग्यता के कब्जे के कारण केवल गारंटी करेगा. नियम विपरीत इस के सिवा जाना नहीं, लेकिन केवल प्रदान कि उम्मीदवारों से पहले चयन समिति उम्मीदवारों की सूची, जो सहायक शिक्षक के पद पर नियुक्ति के लिए आवेदन किया है के द्वारा माना जा रहा है, और तैयार किया जाएगा कि सूची के TET, तैयारी में निशान मापदंड के क्षेत्र का पता लगाने के लिए एक दिशानिर्देश की तरह करेगा.2 - -विचार और पात्रता की लेकिन स्वयं के द्वारा क्षेत्र में नियुक्ति के लिए कोई गारंटी नहीं प्रदान करता है. नियम इस प्रकार दिशानिर्देशों एनसीटीई विपरीत नहीं कहा जा सकता.3. कोई हस्तक्षेप इसलिए बुलाया के लिए.4. खारिज कर दिया.आदेश दिनांक: 2012/01/02के.ए.8:03 PM पर मुस्कान द्वारा पोस्टईमेल ThisBlogThis! फेसबुक TwitterShare पर शेयरलेबल: 2011 उत्तर प्रदेश TET
प्रकरण विवरण देखें:इलाहाबाद में महकमा के उच्च न्यायालय? कोर्ट सं - 33
प्रकरण: - रिट - 2011 - 75474 के एक सं.
याचिकाकर्ता: - डॉ. प्रशांत कुमार दुबेप्रतिवादी: - उत्तर प्रदेश स्टेट और अन्ययाचिकाकर्ता वकील: - आलोक मिश्राप्रतिवादी वकील: - C.S.C.
माननीय सुधीर अग्रवाल, जे.1. वकील याचिकाकर्ता के लिए सीखा है कि नियम 14 (1) प्रस्तुत करने की कोशिश की और उत्तर प्रदेश (2) के मूल (शिक्षक) शिक्षा सेवा नियम, 1981 के रूप में अधिसूचना द्वारा संशोधन 9th नवंबर को, 2011 उत्तर प्रदेश में संशोधन कर बेसिक शिक्षा (शिक्षक) सेवा नियमावली, 1981 यानी 12 वीं संशोधन अवैध है, यद्यपि के रूप में, यह द्वारा तैयार किया जा सूची में एक व्यक्ति सहित के लिए आधार के रूप में शिक्षक पात्रता परीक्षा (hereinafter के रूप में "TET" कहा जाता है) में प्राप्त अंकों बनाता है जो चयन समिति को प्रस्तुत TET हालांकि नियुक्ति के लिए जारी विज्ञापन के बाद नियुक्ति प्राधिकारी केवल पात्रता योग्यता है और चयन करने के लिए एक आधार नहीं कर सकते.
2]. प्रस्तुत अच्छी तरह से गलत है. कल्पना का कोई मायने द्वारा नियम के पूर्वोक्त संशोधन, नेशनल काउंसिल फॉर टीचर एजुकेशन (hereinafter के रूप में "एनसीटीई" कहा जाता है) द्वारा जारी दिशा - निर्देशों के विपरीत के रूप में लगाया जा सकता है है यद्यपि के रूप में, एनसीटीई TET प्रदान करता है प्राथमिक शिक्षकों की नियुक्ति के लिए आवश्यक योग्यता के रूप में योग्यता है, लेकिन एक साथ प्रदान करता है कि यह किसी भी व्यक्ति को नियुक्ति नहीं ऐसी योग्यता के कब्जे के कारण केवल गारंटी करेगा. नियम विपरीत इस के सिवा जाना नहीं, लेकिन केवल प्रदान कि उम्मीदवारों से पहले चयन समिति उम्मीदवारों की सूची, जो सहायक शिक्षक के पद पर नियुक्ति के लिए आवेदन किया है के द्वारा माना जा रहा है, और तैयार किया जाएगा कि सूची के TET, तैयारी में निशान मापदंड के क्षेत्र का पता लगाने के लिए एक दिशानिर्देश की तरह करेगा.2 - -विचार और पात्रता की लेकिन स्वयं के द्वारा क्षेत्र में नियुक्ति के लिए कोई गारंटी नहीं प्रदान करता है. नियम इस प्रकार दिशानिर्देशों एनसीटीई विपरीत नहीं कहा जा सकता.3. कोई हस्तक्षेप इसलिए बुलाया के लिए.4. खारिज कर दिया.आदेश दिनांक: 2012/01/02के.ए.8:03 PM पर मुस्कान द्वारा पोस्टईमेल ThisBlogThis! फेसबुक TwitterShare पर शेयरलेबल: 2011 उत्तर प्रदेश TET
कोर्ट सं - 33
प्रकरण: - रिट - 1337 - 2012 के एक सं.
याचिकाकर्ता: - सत्य पाल सिंह और अन्यप्रतिवादी: - दूसरों की भारत और संघयाचिकाकर्ता वकील: - Rajjan लालप्रतिवादी वकील: - A.S.G.I., C.S.C. (2012/277)
माननीय सुधीर अग्रवाल, जे.1. याचिकाकर्ता के लिए सीखा दोहराया क्वेरी के बावजूद, वकील के रूप में वह इस रिट याचिका दायर की है क्यों और किस तरह वह इरादा है में स्पष्ट नहीं 2011/7/9 को सचिव द्वारा जारी अधिसूचना को चुनौती उत्तर प्रदेश सकता है सरकार, लखनऊ, (अनुबंध रिट याचिका 2). उन्होंने दलील दी कि माध्यमिक शिक्षा बोर्ड द्वारा आयोजित शिक्षक पात्रता टेस्ट, अपने पत्र के साथ 2011/11/02 दिनांक और पैरा 2 तत्संबंधी जो नीचे के रूप में पढ़ता है के लिए मेरा ध्यान आकर्षित किया साथ नीचे के राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा परिषद द्वारा निर्धारित दिशा निर्देशों के अनुसार में नहीं किया गया आयोजित किया गया है:2?. बच्चे का अधिकार के 23 मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा (आरटीई) अधिनियम, 2009 के खंड के उप - धारा (1) के प्रावधानों के अनुसार, नेशनल काउंसिल फॉर टीचर एजुकेशन (एनसीटीई) निर्धारित है एक व्यक्ति के लिए न्यूनतम योग्यता एक शिक्षक कक्षा में मैं आठवीं तक, इसकी अधिसूचना दिनांक 23 अगस्त, 2010 ख़बरदार के रूप में नियुक्ति के लिए पात्र होने के लिए. अधिसूचना की एक प्रति अनुबंध 1 के रूप में संलग्न है. एक व्यक्ति आरटीई अधिनियम की धारा 2 के खंड (n) में निर्दिष्ट किसी भी स्कूल के एक शिक्षक के रूप में नियुक्ति के लिए पात्र हो के लिए आवश्यक योग्यता है कि वह / वह शिक्षक पात्रता परीक्षा पास (TET) जो उपयुक्त सरकार द्वारा आयोजित किया जाएगा.?2. दोहराया कैसे कहा मार्गनिर्देशों के अनुरूप नहीं पीछा किया गया था के रूप में उसके पास से बनाया क्वेरी में, वह तर्क उस दिशा उसमें निहित है कि यह सुनिश्चित किया जाए कि व्यक्तियों के शिक्षकों posses के रूप में आवश्यक योग्यता और के लिए प्राथमिक शिक्षण की चुनौतियों को पूरा करने की क्षमता और भर्ती उच्च प्राथमिक स्तर पूर्वोक्त परीक्षा आयोजन में नहीं देखा है और जांच शरीर अनुचित साधनों और अनुपयुक्त चयन का दोषी है, को अवैध रूप से किया गया है. हालांकि, वह किसी भी बात नहीं विशेष रूप से दोहराया क्वेरी के बावजूद, लेकिन दिखा सकता है एक सामान्यीकृत और अस्पष्ट तरीके से कहा है कि सभी व्यक्ति जो परीक्षा उत्तीर्ण की है न तो योग्य और न ही उपयुक्त उम्मीदवार हैं. यह स्पष्ट रूप से न केवल जांच के शरीर के खिलाफ भी लेकिन लोग हैं, जो परीक्षा में भाग लिया और एक ही पारित लाख के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी है. बयान एक सबसे लापरवाह और लापरवाह तरीके से, जो मेरे विचार में, स्पष्ट रूप से कानून और इसलिए की प्रक्रिया का दुरुपयोग करने के लिए मात्रा में किया जाता है, अनुकरणीय लागत के साथ रिट याचिका खारिज कर दिया जाना चाहिए.3. खारिज कर दिया.4. चूंकि याचिकाकर्ता न केवल शरीर की जांच के खिलाफ निराधार aspersions करने का दोषी है, लेकिन यह भी एक व्यक्ति जो परीक्षा उत्तीर्ण की है के खिलाफ है, वह अनुकरणीय लागत का भुगतान करना होगा. मैं रुपए की लागत यों. 4.5 लाख.5. पूर्वोक्त राशि प्रतिवादी को याचिकाकर्ता द्वारा कोई भुगतान किया जाएगा. 3 जो राशि प्राप्त करने के बाद, सभी उम्मीदवार जो अंततः रुपये का भुगतान परीक्षा बीत चुके हैं के बीच एक ही वितरित करेगा. 1 / - प्रत्येक सफल उम्मीदवार के लिए.Dt. 2012/01/12PS-1337/12
प्रकरण: - रिट - 1337 - 2012 के एक सं.
याचिकाकर्ता: - सत्य पाल सिंह और अन्यप्रतिवादी: - दूसरों की भारत और संघयाचिकाकर्ता वकील: - Rajjan लालप्रतिवादी वकील: - A.S.G.I., C.S.C. (2012/277)
माननीय सुधीर अग्रवाल, जे.1. याचिकाकर्ता के लिए सीखा दोहराया क्वेरी के बावजूद, वकील के रूप में वह इस रिट याचिका दायर की है क्यों और किस तरह वह इरादा है में स्पष्ट नहीं 2011/7/9 को सचिव द्वारा जारी अधिसूचना को चुनौती उत्तर प्रदेश सकता है सरकार, लखनऊ, (अनुबंध रिट याचिका 2). उन्होंने दलील दी कि माध्यमिक शिक्षा बोर्ड द्वारा आयोजित शिक्षक पात्रता टेस्ट, अपने पत्र के साथ 2011/11/02 दिनांक और पैरा 2 तत्संबंधी जो नीचे के रूप में पढ़ता है के लिए मेरा ध्यान आकर्षित किया साथ नीचे के राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा परिषद द्वारा निर्धारित दिशा निर्देशों के अनुसार में नहीं किया गया आयोजित किया गया है:2?. बच्चे का अधिकार के 23 मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा (आरटीई) अधिनियम, 2009 के खंड के उप - धारा (1) के प्रावधानों के अनुसार, नेशनल काउंसिल फॉर टीचर एजुकेशन (एनसीटीई) निर्धारित है एक व्यक्ति के लिए न्यूनतम योग्यता एक शिक्षक कक्षा में मैं आठवीं तक, इसकी अधिसूचना दिनांक 23 अगस्त, 2010 ख़बरदार के रूप में नियुक्ति के लिए पात्र होने के लिए. अधिसूचना की एक प्रति अनुबंध 1 के रूप में संलग्न है. एक व्यक्ति आरटीई अधिनियम की धारा 2 के खंड (n) में निर्दिष्ट किसी भी स्कूल के एक शिक्षक के रूप में नियुक्ति के लिए पात्र हो के लिए आवश्यक योग्यता है कि वह / वह शिक्षक पात्रता परीक्षा पास (TET) जो उपयुक्त सरकार द्वारा आयोजित किया जाएगा.?2. दोहराया कैसे कहा मार्गनिर्देशों के अनुरूप नहीं पीछा किया गया था के रूप में उसके पास से बनाया क्वेरी में, वह तर्क उस दिशा उसमें निहित है कि यह सुनिश्चित किया जाए कि व्यक्तियों के शिक्षकों posses के रूप में आवश्यक योग्यता और के लिए प्राथमिक शिक्षण की चुनौतियों को पूरा करने की क्षमता और भर्ती उच्च प्राथमिक स्तर पूर्वोक्त परीक्षा आयोजन में नहीं देखा है और जांच शरीर अनुचित साधनों और अनुपयुक्त चयन का दोषी है, को अवैध रूप से किया गया है. हालांकि, वह किसी भी बात नहीं विशेष रूप से दोहराया क्वेरी के बावजूद, लेकिन दिखा सकता है एक सामान्यीकृत और अस्पष्ट तरीके से कहा है कि सभी व्यक्ति जो परीक्षा उत्तीर्ण की है न तो योग्य और न ही उपयुक्त उम्मीदवार हैं. यह स्पष्ट रूप से न केवल जांच के शरीर के खिलाफ भी लेकिन लोग हैं, जो परीक्षा में भाग लिया और एक ही पारित लाख के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी है. बयान एक सबसे लापरवाह और लापरवाह तरीके से, जो मेरे विचार में, स्पष्ट रूप से कानून और इसलिए की प्रक्रिया का दुरुपयोग करने के लिए मात्रा में किया जाता है, अनुकरणीय लागत के साथ रिट याचिका खारिज कर दिया जाना चाहिए.3. खारिज कर दिया.4. चूंकि याचिकाकर्ता न केवल शरीर की जांच के खिलाफ निराधार aspersions करने का दोषी है, लेकिन यह भी एक व्यक्ति जो परीक्षा उत्तीर्ण की है के खिलाफ है, वह अनुकरणीय लागत का भुगतान करना होगा. मैं रुपए की लागत यों. 4.5 लाख.5. पूर्वोक्त राशि प्रतिवादी को याचिकाकर्ता द्वारा कोई भुगतान किया जाएगा. 3 जो राशि प्राप्त करने के बाद, सभी उम्मीदवार जो अंततः रुपये का भुगतान परीक्षा बीत चुके हैं के बीच एक ही वितरित करेगा. 1 / - प्रत्येक सफल उम्मीदवार के लिए.Dt. 2012/01/12PS-1337/12
Saturday, 21 January 2012
?Court No. - 33
Case :- WRIT - A No. - 1337 of 2012
Petitioner :- Satya Pal Singh & Others
Respondent :- Union Of India & Others
Petitioner Counsel :- Rajjan Lal
Respondent Counsel :- A.S.G.I.,C.S.C. (2012/277)
Hon'ble Sudhir Agarwal,J.
1. Learned counsel for petitioner, despite repeated query could not clarify as to why he has filed this writ petition and in what manner he intend to challenge the notification dated 7.9.2011 issued by Secretary, U.P. Government, Lucknow (Annexure 2 to writ petition). He contended that Teachers Eligibility Test conducted by Board of Secondary Education has not been conducted in accordance with guidelines laid down by National Council of Teachers Education along with its letter dated 11.2.2011 and drew my attention to para 2 thereof which reads as under:
?2. In accordance with the provisions of Sub-section (1) of section 23 of the Right of Children to Free and Compulsory Education (RTE) Act, 2009, the National Council for Teacher Education (NCTE) has laid down the minimum qualifications for a person to be eligible for appointment as a teacher in class I to VIII, vide its Notification dated August 23, 2010. A copy of the Notification is attached as Annexure 1. One of the essential qualifications for a person to be eligible for appointment as a teacher in any of the Schools referred to in clause (n) of section 2 of the RTE Act is that he/she should pass the Teacher Eligibility Test (TET) which will be conducted by the appropriate Government.?
2. On repeated query made from him as to how the said guidelines were not followed, he contended that the direction contained therein that it shall be ensured that the persons recruited as teachers posses the essential aptitude and ability to meet the challenges of teaching at the primary and upper primary level has not been observed in conducting the aforesaid examination and the examining body is guilty of unfair means and unsuitable selections have been made illegally. However, he could not show any thing specifically despite repeated query but in a generalized and vague manner said that all the persons who have passed the examination are neither qualified nor suitable candidates. This is clearly a derogatory remark not only against the examining body but also against lacs of people who participated in the examination and passed the same. The statement is made in a most careless and reckless manner which, in my view, clearly amounts to abuse of process of laws and, therefore, the writ petition must be dismissed with exemplary cost.
3. Dismissed.
4. Since petitioner is not only guilty of making unfounded aspersions against examining body, but also against the persons who have passed the examination, he must pay exemplary cost. I quantify the cost to Rs. 4.5 lacs.
5. The aforesaid amount shall be paid by petitioner to respondent no. 3 who, after receiving the amount, shall distribute the same amongst all the candidate who have passed the examination finally paying Rs. 1/- to each successful candidate.
Dt. 12.1.2012
PS-1337/12
Case :- WRIT - A No. - 1337 of 2012
Petitioner :- Satya Pal Singh & Others
Respondent :- Union Of India & Others
Petitioner Counsel :- Rajjan Lal
Respondent Counsel :- A.S.G.I.,C.S.C. (2012/277)
Hon'ble Sudhir Agarwal,J.
1. Learned counsel for petitioner, despite repeated query could not clarify as to why he has filed this writ petition and in what manner he intend to challenge the notification dated 7.9.2011 issued by Secretary, U.P. Government, Lucknow (Annexure 2 to writ petition). He contended that Teachers Eligibility Test conducted by Board of Secondary Education has not been conducted in accordance with guidelines laid down by National Council of Teachers Education along with its letter dated 11.2.2011 and drew my attention to para 2 thereof which reads as under:
?2. In accordance with the provisions of Sub-section (1) of section 23 of the Right of Children to Free and Compulsory Education (RTE) Act, 2009, the National Council for Teacher Education (NCTE) has laid down the minimum qualifications for a person to be eligible for appointment as a teacher in class I to VIII, vide its Notification dated August 23, 2010. A copy of the Notification is attached as Annexure 1. One of the essential qualifications for a person to be eligible for appointment as a teacher in any of the Schools referred to in clause (n) of section 2 of the RTE Act is that he/she should pass the Teacher Eligibility Test (TET) which will be conducted by the appropriate Government.?
2. On repeated query made from him as to how the said guidelines were not followed, he contended that the direction contained therein that it shall be ensured that the persons recruited as teachers posses the essential aptitude and ability to meet the challenges of teaching at the primary and upper primary level has not been observed in conducting the aforesaid examination and the examining body is guilty of unfair means and unsuitable selections have been made illegally. However, he could not show any thing specifically despite repeated query but in a generalized and vague manner said that all the persons who have passed the examination are neither qualified nor suitable candidates. This is clearly a derogatory remark not only against the examining body but also against lacs of people who participated in the examination and passed the same. The statement is made in a most careless and reckless manner which, in my view, clearly amounts to abuse of process of laws and, therefore, the writ petition must be dismissed with exemplary cost.
3. Dismissed.
4. Since petitioner is not only guilty of making unfounded aspersions against examining body, but also against the persons who have passed the examination, he must pay exemplary cost. I quantify the cost to Rs. 4.5 lacs.
5. The aforesaid amount shall be paid by petitioner to respondent no. 3 who, after receiving the amount, shall distribute the same amongst all the candidate who have passed the examination finally paying Rs. 1/- to each successful candidate.
Dt. 12.1.2012
PS-1337/12
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